(1) मरीचि के पुत्र कश्यप प्रजापति थे। ब्रह्मदेव की दाहिनी हाथ की बोटे की नली से दक्ष नाम का पुरुष और बाएँ हाथ की बोटे की नली से धरनी नाम की स्त्री जन्मीं। उन दोनों से एक हज़ार-हज़ार महा ऋषि जन्मे। (2) ब्रह्मा के मानस पुत्रों में दूसरे स्थान पर रहने वाले अंगिरस्‍ु को उद्दध्य, बृहस्पति और संवर्त जैसे पुत्र हुए। बृहस्पति देवताओं के आचार्य बने। (3) मैत्रि (अत्रि) नामक मानस पुत्र से अनेक महा मुनि जन्मे। (4) पुलस्त्य नामक ब्रह्मा के मानस पुत्र से राक्षसों का जन्म हुआ। (5) पुलह नामक मानस पुत्र से किन्नर और किमपुरुष वर्ग उत्पन्न हुए। (6) क्रतू नामक मानस पुत्र से पक्षियों की जाति उत्पन्न हुई।

   
    

Aadiparv (Mahabharat) - आदिपर्व (महाभारत)


॥ श्रीः ॥
1.59. अध्यायः 059
(अथांशावतरणपर्व ॥ 6 ॥)
Mahabharata - Adi Parva - Chapter Topics
सौतेर्भारतकथनप्रतिज्ञा॥ 1 ॥
Mahabharata - Adi Parva - Chapter Text

शौनक उवाच। 1-59-0x(289)(2349)
भृगुवंशात्प्रभृत्येव त्वया मे कीर्तितं महत्।
आख्यानमखिलं तात सौते प्रीतोऽस्मितेन ते॥ 1-59-1(2350)
प्रक्ष्यामि चैव भूयस्त्वां यथावत्सूतनन्दन।
याः कथा व्याससंपन्नास्ताश्च भूयो विचक्ष्व मे॥ 1-59-2(2351)
तस्मिन्परमदुष्पारे सर्पसत्रे महात्मनाम्।
कर्मान्तरेषु यज्ञस्य सदस्यानां तथाऽध्वरे॥ 1-59-3(2352)
या बभूवुः कथाश्चित्रा येष्वर्थेषु यथातथम्।
त्वत्त इच्छामहे श्रोतुं सौते त्वं वै प्रचक्ष्व नः॥ 1-59-4(2353)
सौतिरुवाच। 1-59-5x(290)
कर्मान्तरेष्वकथयन्द्विजा वेदाश्रयाः कथाः।
व्यासस्त्वकथयच्चित्रमाख्यानं भारतं महत्॥ 1-59-5(2354)
शौनक उवाच। 1-59-6x(291)
महाभारतमाख्यानं पाण्डवानां यशस्करम्।
जनमेजयेन पृष्टः सन्कृष्णद्वैपायनस्तदा॥ 1-59-6(2355)
श्रावयामास विधिवत्तदा कर्मान्तरे तु सः।
तामहं विधिवत्पुण्यां श्रोतुमिच्छामि वै कथाम्॥ 1-59-7(2356)
मनःसागरसंभूतां महर्षेर्भावितात्मनः।
कथयस्व सतां श्रेष्ठ सर्वरत्नमयीमिमाम्॥ 1-59-8(2357)
सौतिरुवाच। 1-59-9x(292)
हन्त ते कथयिष्यामि महदाख्यानमुत्तमम्।
कृष्णद्वैपायनमतं महाभारतमादितः॥ 1-59-9(2358)
शृणु सर्वमशेषेण कथ्यमानं मया द्विज।
शंसितुं तन्महान्हर्षो ममापीह प्रवर्तते॥ ॥ 1-59-10(2359)

इति श्रीमन्महाभारते आदिपर्वणि अंशावतरणपर्वणि एकोनषष्टितमोऽध्यायः॥ 59 ॥


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